*अब खुलेंगे स्कूल, 6 चरणों में होगी पढ़ाई, लागू होगा ऑड-ईवन नियम*बिहर सरकार सितम्बर व नवम्बर के बीच  स्कूल खोलने की तैयारी मे जुटा , केंद्र सरकार न स्कूल  खोलने की जारी कि गाइडलाइन  - NewstvBihar *अब खुलेंगे स्कूल, 6 चरणों में होगी पढ़ाई, लागू होगा ऑड-ईवन नियम*बिहर सरकार सितम्बर व नवम्बर के बीच  स्कूल खोलने की तैयारी मे जुटा , केंद्र सरकार न स्कूल  खोलने की जारी कि गाइडलाइन  - NewstvBihar

*अब खुलेंगे स्कूल, 6 चरणों में होगी पढ़ाई, लागू होगा ऑड-ईवन नियम*बिहर सरकार सितम्बर व नवम्बर के बीच  स्कूल खोलने की तैयारी मे जुटा , केंद्र सरकार न स्कूल  खोलने की जारी कि गाइडलाइन 

Odd-even rule

*अब खुलेंगे स्कूल, 6 चरणों में होगी पढ़ाई, लागू होगा ऑड-ईवन नियम*Odd-even rule * बिहर सरकार सितम्बर व नवम्बर के बीच  स्कूल खोलने की तैयारी मे जुटी  , केंद्र सरकार ने स्कूल  खोलने की जारी कि गाइडलाइन 

पटना से न्यूज़ टी वी बिहर के संवाददाता की रिपोर्ट 
बिहार पटना :-*अब खुलेंगे स्कूल, 6 चरणों में होगी पढ़ाई, लागू होगा ऑड-ईवन नियम*Odd-even rule * बिहर सरकार सितम्बर व नवम्बर के बीच  स्कूल खोलने की तैयारी मे जुटा , केंद्र सरकार न स्कूल  खोलने की जारी कि गाइडलाइन  |खुशखबरी है। जल्द ही स्कूल वापस खुलेंगे। इसको लेकर एनसीईआरटी ने गाइडलाइंस जारी की है। कोरोना वायरस (Coronavirus) के बीच स्कूलों को दोबारा (School Re Opening) खोलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। एनसीईआरटी ने अपनी गाइडलाइंस का ड्राफ्ट (NCERT Guidelines Draft) सरकार को सौंप दिया है। इसके तहत बताया गया है कि स्कूल खुलने पर पढ़ाई का सिलसिला किस तरह शुरू होगा और बच्चों, पेरेंट्स व टीचर्स के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होगा।Odd-even rule

एनसीईआरटी गाइडलाइन के मुख्य बिंदु :

स्कूल खुलने के नियम :

– हर बच्चे के लिए मास्क पहनना जरूरी होगा, स्कूल में सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल न रखने पर बच्चे के पेरेंट्स को सूचित किया जाएगा।

– कक्षा में छात्रों के बीच 6 फीट की दूरी होगी जरूरी, एक कमरे में 15 से 25 बच्चे ही होंगे

– बच्चे सीट न बदलें, इसके लिए डेस्क पर नाम लिखा होगा। रोज वहीं बैठना होगा।

– बच्चे ऑड-ईवन के आधार पर बुलाए जाएंगे, होम असाइनमेंट प्रतिदिन देना होगा।

-कक्षा के दरवाजे-खिड़कियां खुली रहेंगी, एसी नहीं चलेंगे

– स्कूल में प्रवेश से पहले छात्रों और स्टाफ की स्क्रीनिंग होगी। स्कूल के बाहर खाने-पीने के स्टॉल नहीं लगेंगी।

– छात्रों के बीच कॉपी, पेन, पेंसिल या खाना शेयर नहीं होगा, बच्चों को अपना पानी साथ लाना होगा।
– कमरे रोजाना सैनिटाइज हों, ये स्कूल प्रबंधन सुनिश्चित करेगा। मॉर्निंग असेंबली और एनुअल फंक्शन जैसा कोई आयोजन नहीं होगा।Odd-even rule

*इन छह चरणों में शुरू होगी पढ़ाई*
1. पहले चरण में 11वीं और 12वीं की कक्षाएं शुरू की जाएंगी।
2. इसके एक हफ्ते बाद नौवीं और दसवीं की पढ़ाई शुरू होगी।
3. तीसरे चरण में दो हफ्ते बाद छठी से लेकर आठवीं तक की कक्षाएं शुरू होंगी।
4. इसके तीन हफ्ते बाद तीसरी से लेकर पांचवीं तक की पढ़ाई होने लगेंगी।
5. पांचवां चरण पहली और दूसरी कक्षाओं की शुरुआत का होगा।
6. छठे चरण में पांच हफ्ते बाद अभिभावकों की मंजूरी के साथ नर्सरी व केजी की कक्षाएं शुरू होंगी। हालांकि कंटेनमेंट जोन के स्कूल ग्रीन जोन बनने तक बंद ही रहेंगे।Odd-even rule
*अपनाए जाएंगे ये उपाय*
– क्लास में स्टूडेंट्स के बीच 6 फीट की दूरी जरूरी होगी। एक कमरे में 30 या 35 बच्चे होंगे।
– क्लासरूम के दरवाजे-खिड़कियां खुली रहेंगी और एसी नहीं चलाए जा सकेंगे।
– बच्चे ऑड-ईवन के आधार पर बुलाए जाएंगे, लेकिन होम असाइनमेंट प्रतिदिन देना होगा।
– बच्चे सीट न बदलें, इसके लिए डेस्क पर नाम लिखा होगा। रोज वहीं बैठना होगा।
– कक्षाएं शुरू होने के बाद हर 15 दिन में बच्चे की प्रोग्रेस को लेकर पेरेंट्स से बात करनी होगी।
– कमरे रोजाना सैनिटाइज हों, ये सुनिश्चित करना प्रबंधन का काम होगा. मॉर्निंग असेंबली और एनुअल फंक्शन जैसा कोई आयोजन नहीं होगा।
– स्कूल में प्रवेश से पहले छात्रों और स्टाफ की स्क्रीनिंग होगी। स्कूल के बाहर खाने-पीने के स्टॉल नहीं लगाए जाएंगे।
– बच्चों के लिए कॉपी, पेन, पेंसिल या खाना शेयर करने की मनाही होगी. बच्चों को अपना पानी साथ लाना होगा।
– हर बच्चे के लिए मास्क पहनना जरूरी होगी. स्कूल में सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल न रखने पर बच्चे के पेरेंट्स को सूचित किया जाएगा।
ये बातें भी रखनी होगी ध्यान
– चिकित्सा, सुरक्षा या सफाई संबंधी कामों से जुड़े पेरेंट्स को इसकी सूचना पहले ही स्कूल को देनी होगी।
– उन्हीं अभिभावकों को शिक्षकों से मिलने की अनुमति होगी जो फोन पर संपर्क करने की स्थिति में नहीं होंगे।
– पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग नहीं होगी। ट्रांसपोर्ट को लेकर जल्द ही गाइडलाइन जारी कर दी जाएगी।
– जहां तक हॉस्टल की बात है तो वहां भी छह-छह फीट की दूरी पर बेट लगाने होंगे।।

बंद स्कूलों को खोलने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने गाइडलाइन तैयार की हैं। एनसीईआरटी के निदेशक ऋषिकेश सेनापति ने लोकमत को विशेष बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार बच्चों की पढ़ाई ओर उनके मानसिक विकास को लेकर बहुत चिंतित है।Odd-even rule

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कोरोना संक्रमण से बचाव करते हुए स्कूलों में पढ़ाई कैसे शुरू की जाए, इस पर एनसीईआरटी से गाइडलाइन तैयार करने को कहा था। यह गाइडलाइन तैयार कर मंत्रालय को सौंपी जा चुकी हैं। इन पर अमल गृहमंत्रालय के विचाराधीन है।

शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राज्यों के साथ हुई बैठक में 15 राज्यों ने स्कूल खोलने पर सहमति प्रकट की है। असम सरकार ने एक सितंबर से स्कूल खोलने की बात कही है। इससे पहले असम में सभी शिक्षक और कर्मचारियों का कोरोना टेस्ट होगा। सरकार ने स्कूल खोलने पर छात्र और अभिभावकों से 20 अगस्त तक सुझाव भी मांगे हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा के जरिये कार्यरूप लेगा : सीबीएसई

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के निदेशक ने शुक्रवार को कहा कि नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा के जरिये कार्यरूप लेगा। नयी नीति में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अनेक सुधार का प्रस्ताव किया गया है।

सीबीएसई के निदेशक विश्वजीत साहा ने पीएचडी चैम्बर्स आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के एक कार्यक्रम में कहा, ”नीति में विभिन्न सिद्धांतों एवं बहु विषय पहल के समागम की स्वतंत्रता प्रदान की गई है । राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा नीति में सुझाये सुधारों को लागू करने का खाका प्रदान करेगा।” उन्होंने कहा, ”नीति का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा के जरिये कार्यरूप लेगा जिसके लिये अधिक से अधिक सहभागिता वाले कदमों की जरूरत है। ”Odd-even rule

साहा ने कहा कि प्रतिस्पर्धी शिक्षा और शिक्षण परिणाम के लिये जरूरी प्रशिक्षण सभी पक्षकारों की प्रगतिशील सहभागिता से हासिल की जा सकती है। सीबीएसई के निदेशक ने कहा, ”प्रतिस्पर्धी शिक्षा और शिक्षण परिणाम के लिये जरूरी प्रशिक्षण के बारे में चर्चा हो सकती है लेकिन एक बार हमने निर्णय कर लिया तब हम इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं। यह सभी पक्षकारों की प्रगतिशील सहभागिता से हासिल की जा सकती है। यह अग्रगामी नीति है।”

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में नयी शिक्षा नीति को मंजूरी दी जिसने 1986 में लागू 34 वर्ष पुरानी शिक्षा नीति का स्थान लिया है। इसके माध्यम से स्कूली शिक्षा से उच्च शिक्षा तक रूपांतरकारी सुधारों का मार्ग प्रशस्त हुआ है ताकि भारत को ज्ञान आधारित महाशक्ति बनाया जा सके। इसमें स्कूली शिक्षा में सुधार, पांचवी कक्षा तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा, 3 या 4 वर्ष का स्नातक कोर्स चुनने का विकल्प, डिग्री कोर्स में बहु स्तरीय प्रवेश या निकासी की व्यवस्था, उच्च शिक्षा में एकल नियामक, फीस तय किये जाने सहित अनेकों सुधारों की बात कही गई है।

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