मास्टर साहब की अब प्रतिदिन मोबाइल एप्प पर बनेगी हाजरी , मैप द्वारा होगा शिक्षकों का लोकेशन ट्रेस , अब नही चलेगी कोई भी मनमानी , शिक्षा विभाग ने पूरी कर ली है तैयारी 

बिहार पटना :– बिहार के स्कूलों में बच्चों की कम उपस्थिति क्रोनिक समस्या बन गयी है। इसे दूर करने के लिए बिहार सरकार सख्त कदम उठाने के मूड में है। अब चेंकिग के दिन उपस्थिति कम हुई तो कार्रवाई होगी।

शिक्षा विभाग अब सभी सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की हाजरी मोबाइल एप्लीकेशन से लेने की तैयारी में जुट गई है । अब सभी शिक्षकों को अपने मोबाइल पर है ही ऑनलाइन अटेंडेंस बनानी होगी ।विभाग शिक्षकों पर मैप के द्वारा शिक्षकों के लोकेशन को ट्रैक करती रहेगी । यदि कोई भी शिक्षक स्कूल से समय से पहले बाहर निकलेंगे तो इसकी सूचना शिक्षा विभाग को तुरंत मिल जाएगी और मिनटों में सभी अधिकारियों को उस शिक्षकों के बारे मे मेल पहुँच जाएगा । 

यदि शिक्षक विद्यालय केम्पस से बाहर मोबाइल से अटेंडेंस बनाने की कोशिश करेंगे तो incorrect का ऑप्शन दिखेगा । अब बिहार सरकार शिक्षकों पर नजर रखने के लिए तीसरी आँख की तैयारी में लग गई है बहुत जल्द इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा । इससे शिक्षा में गुणवत्ता आएगी ।

इसके लिए प्राचार्य और शिक्षक दोनों जिम्मेवार माने जाएंगे। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में पुराने प्रावधान को और सख्त बना दिया है। इसके तहत स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति 60 फीसदी से किसी सूरत में कम नहीं होनी चाहिए।

उपस्थिति बढाने के लिए कई स्तरों प्रयास किए जा रहे हैं। हेड क्वार्टर से लेकर जिला शिक्षा विभाग के पदाधिकारी और प्रशासनिक पदाधिकारी निरीक्षण कर रहे हैं। कहा गया है कि यदि मानिटरिंग के दिन स्कूलों में 60 फीसदी से कम बच्चे पाए गए तो प्राचार्य और शिक्षक इसके लिए जिम्मेवार माने जाएंगे। उन्हें अनुपस्थित छात्र और छात्राओं के अभिभावकों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करना होगा और छात्र-छात्राओं की उपस्थिति सुनिश्चित करना होगी। उन्हें कम से कम 75 फीसदी बच्चों को स्कूल लाना होगा। हालांकि इसके लिए वे विद्यालय शिक्षा समिति या विद्यालय प्रबंधन समिति की सहायता ले सकेंगे।

हर माह देना है मानिटरिंग की रिपोर्ट

शिक्षा विभाग ने स्कूलों की मानिटरिंग को और कड़ा करते हुए इसके लिए व्यापक दिशा-निर्देश दिया है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी तक के दायित्व तय किये गये हैं। उन्हें हर माह स्कूलों का निरीक्षण करने और उससे संबंधित रिपोर्ट तलब की है। इसमें स्कूलों की अवधि को लेकर भी कड़ाई की गयी है। देर से आने वाले प्राचार्य और शिक्षकों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गयी है। स्कूल के निर्धारित समय पर नहीं खुलने या फिर निर्धारित समय से पहले बंद होने की पर प्राचार्य जिम्मेवार माने जाएंगे। इस स्थिति में संबंधित प्राचार्य के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

क्या कहते हैं अपर मुख्य सचिव

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह का कहना है कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति को लेकर सरकार बेहद गंभीर है। इसीलिए प्राचार्य और शिक्षकों को यह दायित्व सौंपा गया है। वे इस दिशा में पहले से प्रयास करते भी रहे हैं। दरअसल, यह दायित्व सौंपकर शिक्षकों को सजग करना इसका मकसद है। शिक्षक बच्चों के आदर्श होते हैं, लिहाजा उनकी बातों का बच्चों पर सीधा असर होता है।

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