बिहार में जल्द ही बड़े पैमाने में आशा बहुओं की होगी बहाली , इतना रुपये मिलेगा मानदेय , 

Bihar news: बिहार स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों के सेहत की देखभाल करने के लिए पंचायत और वार्ड स्तर पर आशा बहुओं की बहाली को लेकर एक बड़ा अपडेट जारी किया है.

सरकारी अपडेट के मुताबिक बिहार में जल्द ही 6537 आशा कार्यकर्ताओं की भर्ती की जाएगी.

बता दें कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक दशक से आशा कार्यकर्ताओं की बहाली होती रही है. आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर गर्भवती महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल करती हैं. साथ ही सुरक्षित प्रसव कराने के लिए उन्हें सरकारी अस्पतालों में ले जाने के लिए प्रेरित करती हैं.

दरभंगा में 543 पदों पर होगी बहाली

दरभंगा जिले की बात करें को जिले के विभिन्न पंचायतों में जिले के विभिन्न पंचायतों में आशा कार्यकर्ताओं के काफी पद खाली हैं, जिन्हें भरने के लिए अब कवायद की जा रही है. जानाकरी के मुताबिक जिले में जल्द ही 543 आशा के पदों पर बहाली निकाली जाएगी. बता दें कि आशा कार्यकर्ताओं के पहल के चलते ही बिहार में जच्चा-बच्चा मृत्यु दर में भी काफी कमी आई है.

मुखिया के माध्यम से की जाती है नियुक्ति

बता दें कि आशा बहुओं की बहाली पंचायत स्तर पर मुखिया के द्वारा आमसभा का आयोजन कर किया जाता है. इस पद के लिए उन्हीं को बहाल किया जाता है, तो उस पंचायत कि स्थानीय निवासी हों. इस पद के लिए आवेदिका को कम से कम मैट्रिक पास होना जरूरी है. पहले इस पद के लिए शैक्षणिक योग्यता आठवीं थी. जिसे हाल ही में दसवीं कर दिया गया है. बहाली के बाद आशा कार्यकर्ता अपने-अपने प्रखंडों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत कार्य करती हैं. स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कार्यों में योगदान के एवज में इन्हें मानदेय मिलता है.। मानदेय के रूप में इन्हें 10 हजार रुपये मिलेंगे साथ अन्य भत्ता अलग से देय होगा ।

बहाली की तैयारी शुरू

बिहार के विभिन्न जिला अंतर्गत पंचायतों में बाहली को लेकर तैयारी की जा रही है. मामले को लेकर दरभंगा के उप विकास आयुक्त का कहना है कि जिला पंचायती राज पदाधिकरी से समन्वय स्थापित कर आशा के रिक्त स्थान को भरा जाएगा. आशा कार्यकर्ता की बहाली के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है. बता दें कि रभंगा जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम की उपलब्धि 42 प्रतिशत, अंतरा इंजेक्शन में 75 प्रतिशत, आईयूसीडी में 38 प्रतिशत उपलब्धि रही.

 

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